You are here
इंसानियत शरमा गई-MOTIVATIONAL STORY Motivational Story 

इंसानियत शरमा गई-MOTIVATIONAL STORY

अरे भाई इंसान बनो, यह बात हम सब अपने रोजाना जीवन में बचपन से सुनते आ रहे है जो एक इंसान दूसरे इंसान को कहता है। या इससे विपरीत कि कैसे जानवरो जैसे काम करते हो तुम और न जाने ऐसी कितनी बाते है जो हम अपने कानो से सुनते है। और कभी कभार इंसानो को जानवरो से भी बत्तर कहा जाता है, क्योकि इंसान काम ही वैसा करता है जो काम जानवर भी नहीं करते।

तो सोचने वाली बात यह है कि अगर ऐसी बाते हमें बार बार सुननी पड़ती है तो इसका यही मतलब हुआ ना कि हम सिर्फ बहार से ही इंसान है, अंदर से नहीं।

अब सवाल ये है कि बहार से हम इंसान क्यों नहीं है? क्योकि बहार से इंसान बनने के लिए कभी कभार हमें जानवरो जैसे काम करने पड़ते है। हा, आप सही सुन रहे है कि कभी कभार जानवरो जैसे काम करने पड़ते है तब जाके हमें इंसानो का दर्जा मिलेगा।

खेर, चलो अब जानवरो से जानवरीयत सीखते है जो इंसानियत से कही गुनी अच्छी है।

यूरोप का एक देश था जहा पर यह घटना बनी थी। एक मध्यम वर्गीय घर में रातो को अचानक बिजली चली गई। घर के मालिक ने उसी समय इलेक्ट्रीशियन बुलाया। इलेक्ट्रीशियन ने आकर घर का पुराने ज़माने वाला बिजली बोर्ड देखा और उसने पता लगाया कि घर में बिजली क्यों नहीं है? बस कुछ ही पल में उसने वो ठीक कर दिया।

पर जब बोर्ड बंध करने की बारी आई तो इलेक्ट्रीशियन ने बहार से स्क्रू लगाया लेकिन उसे पता नहीं था कि दीवाल और बोर्ड के बिच एक छिपकली फस गई थी। अब इलेक्ट्रीशियन ने बिना देखे ही स्क्रू लगा दिया। यानि कि बोर्ड पर लगा स्क्रू छिपकली के शरीर से गुजरात हुआ दीवाल में घुस गया था। छिपकली वही पर फस गई और अपनी जगह से हिल भी नहीं सकती थी।

इलेक्ट्रीशियन स्क्रू लगाकर चला गया, घर में बिजली भी ठीक से आने लगी। अब जब तक बोर्ड फिर से नहीं खुलेगा तब तक उस छिपकली के पास निकलने का कोई रास्ता नहीं था।

तक़रीबन सात आठ महीने बाद फिर से एक बार बिजली चली गई और घर के मालिक ने फिर से वोही इलेक्ट्रीशियन को बुलाया। इलेक्ट्रीशियन ने आकर जैसे ही वो बोर्ड खोला तो वो छिपकली उस स्क्रू के बीचो बिच ऐसे ही फसी थी। पर इलेक्ट्रीशियन के पैरो तले जमीन तब खिचक गई जब उसने वो छिपकली को जिन्दा देखा। छिपकली अपनी जगह से हिल रही थी क्योकि कुछ ज्यादा ही समय बाद उसने रौशनी देखि थी।

 

इलेक्ट्रीशियन ने घर के मालिक से पूछा कि यह बिजली बोर्ड इससे पहले कब खोला गया था? घर के मालिक ने बताया की इससे पहले तुमने ही खोला था, तक़रीबन सात आठ महीने पहले।

उतने समय बाद भी वो छिपकली एक ही जगह पर जिन्दा थी यह देखकर इलेक्ट्रीशियन ने घर के मालिक को नजदीक बुलाया और इस बारे में दोनों ने बात की। दोनों सोच रहे थे की ऐसा कैसे मुमकिन है? एक छिपकली एक ही जगह पर इतने समय तक कैसे जिन्दा रह सकती है?

कुछ देर ऐसे ही सोचते रहे और आखिर घर के मालिक ने रास्ता निकालते हुए कहा कि हम एक काम करते है, इस बिजली बोर्ड को ऐसे ही खुला छोड़ देते है और देखते है की छिपकली आखिर जिन्दा कैसे रह रही है?

काफी देर इन्जार किया, आखिर उन्होंने वो नजारा देखा जिसका वे बेसब्री से इंताजर कर रहे थे। एक दूसरी छिपकली अपने मुह में एक मखी पकड़कर लाई और फसी हुई छिपकली के मुह में दे गई, कुछ देर बाद दूसरी छिपकली आई और उसने अपने मुह से पानी निकालकर इस छिपकली के मुह में डाल दिया। दिन में ऐसा तीन बार हुआ और उसे पता चला की ऐसे ही वो फसी हुई छिपकली सात आठ महीने से जिन्दा रह रही है जो एक हैरतंगेज कर देने वाला नजारा था।

इलेक्ट्रीशियन और घर का मालिक बस देखते ही रहे, दोनों को अपने किये पर अफ़सोस जरूर हो रहा था पर उससे भी ज्यादा ख़ुशी इस बात की हुई कि जानवरो का प्यार इंसानो से कही गुनाह बढ़कर होता है। जो उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार देखा था।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट करना न भूले, हम आपकी कमेंट का इंतजार कर रहे है।

जय हिन्द!

Related posts

Leave a Comment

0 Shares
Share
+1
Tweet
Share
Pin
Stumble