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गरीब की झोपडी ने मात देदी,MOTIVATIONAL STORY Motivational Story 

गरीब की झोपडी ने मात देदी,MOTIVATIONAL STORY

जिंदगी पलटने में जरा सा भी समय नहीं लगता, कभी कभी कोई छोटा सा दॄश्य देखकर लोगो को जीने के अंदाज बदल जाते है तो कभी कभी किसी के शब्दो से या कोई छोटी सी बात सुनकर भी जिंदगी के रास्ते बदल जाते है।

जिंदगी दो तरीके से बदलती है। एक वो रास्ता जो सच्चाई से बुराई की ओर ले चलता है, और दूसरा वो रास्ता जो बुराई से सच्चाई की ओर ले चलता है। यह बात सुनकर आपके दिमांग में भी कुछ लोगो के नाम जरूर आये होंगे जिन लोगो की जिंदगी भी इस तरीके से बदली थी। जैसे कि महर्षि वाल्मीकि, जिसे लोग पहले वालिया लुटेरा के नाम से जानते थे जिन्होंने एक दॄश्य देखा और रामायण का सर्जन हुआ। यह दूसरे तरीके का बदलाव है जो बुराई से सच्चाई की ओर ले गया था उसे।

अगर आप फिल्मे देखते है तो आपने यह नाम जरूर सुना होगा, पान सिंह तोमर। जो देश की सेवा करते करते अचानक एक खोफनाक डाकू बन गया था। यह पहले तरीके का बदलाव है जो सच्चाई से बुराई की ओर ले चलता है।

कहने का तात्पर्य यही है की इस तरीके के बदलाव बहुत कम लोगो में आते है और जिनमे भी आते वे लोग बहुत बड़े इंसान बन है। अगर वो बदलाव बुराई की तरफ का है तो आसपास के लोगो का जीना मुश्किल हो जाता है और अगर बदलाव सच्चाई की तरफ का है तो आसपास के लोगो का जीना आसान हो जाता है।

यह सब कैसे? कब? कहा? और क्यों होता है? इस बात का जवाब शायद आप कभी नहीं जान पाएंगे क्योकि यह ऐसी जगह पर भी होता है जिसकी हमने कभी उम्मीद भी ना की हो। खेर चलो छोटी कहानी के जरिये शायद आपको इस बात का जवाब मिल जाये।

गरीब की झोपडी ने मात देदी

शाम ढलते ही गांव से थोड़े दूर एक ट्रैन आई। वैसे तो हर रोज आती है पर आज साथ में एक चोर को लेकर आई थी। गांव में आते आते ट्रैन धीमी पड़ी और वो चोर बड़ी आसानी से रेलवे स्टेशन से दूर उत्तर गया। तगड़ा और काला चोर जिसे देखकर ही हमारे पसीने छूट जाए और वो आज फिर से चोरी करने वाला था।

गाव से बहार एक झोपडी थी जिसमे एक अँधा बेटा और उसकी माँ दोनों सो रहे थे। चोर ने बहार से अनुमान लगाया कि मैं बहुत तगड़ा हु और झोपडी में रहने वाले से तो मैं आसानी से निपट लूंगा पर वो गलत सोच रहा था।

दबे पाव वो झोपडी के अंदर गया और बिना कोई आवाज किए ही वो एक के बाद एक छोटी छोटी चीजे उठाकर अपने बड़े थैले में भरने लगा। धीरे धीरे उसका बड़ा थैला भरने लगा पर चोर तो चोर होता है उसका मन नहीं भर रहा था इसीलिए वो हर चीज ले जाना चाहता था।

अँधा बच्चा सो रहा था पर उसकी माँ जाग चुकी थी लेकिन उसने चोर को रोकने की कोशिश नहीं की, क्योकि चोर था ही इतना डरावना, उसका सामना करना नामुमकिन था।

चोर निकल ने ही वाला था कि उसकी नजर चूल्हे पर पड़ी। चूल्हे पर चकला पड़ा था। चकला मतलब उससे हम रोटी बना सकते है। अब थैले में जगह नहीं थी फिर भी चोर ने चकला उठा लिया और झोपडी से बहार की तरफ आगे बढ़ा।

 

माँ सोते हुए सब देख रही थी पर अब जब चोर ने चुल्हे का चकला उठा लिया तो उससे रहा नहीं गया और उसने हिम्मत करके चोर को रोकते हुए कहा की तुम सब कुछ रखो पर चूल्हे का वो चकला छोड़दो, वरना मेरा बेटा सुबह भूखा मर जायेगा, मैं उस चकले के बिना रोटी नहीं बना पाउगी।

इसी आवाज के साथ चोर के कदम धीमे पड़ गए और उसने दोबारा उस बात को महसूस किया कि सुबह मेरा बेटा भूखा मर जायेगा। ठंडी रात थी फिर भी चोर को पसीना आने लगा उसकी रुहे कापने लगी, पलटकर पीछे देखने की भी हिम्मत नहीं थी अब उस चोर में और देखते ही देखते उसके दोनों हाथ में जो थैले थे वो अपने आप ही छूट गए और जैसे खाली हाथ वो झोपडी में आया था वैसे ही वो खाली हाथ झोपडी से बहार निकल गया।

चोर खाली हाथ जरूर बहार आया पर वो अपनी पुरानी जिंदगी उस झोपडी में छोड़ता गया और एक नई जिंदगी की चोरी करके बहार निकला था।

 

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट करना न भूले, हम आपकी कमेंट का इंतजार कर रहे है।

जय हिन्द!

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