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Philosopher Aristotle Biography in Hindi Biography 

दार्शनिक अरस्तु का जीवन परिचय, Philosopher Aristotle Biography in Hindi

शायद अरस्तु(Philosopher Aristotle) दुनिया के पहले ऐसे इंसान थे जो दुनिया की बनाई हुई परम्परा पर भरोसा नहीं करते थे। ऐसी परम्पराओ की वे पूरी जाँच पड़ताल करते थे और उसके बाद ही वे कोई नजीता निकलते थे। इसी वजह से वे उस समय के महान दार्शनिक बने थे। 

यूनान का स्टेगेरिय नाम का एक नगर था जहा पर ईसा पूर्व 322 में अरस्तु का जन्म हुआ था। अरस्तु लगभग अपने गुरु के अलावा किसी की बात मानते नहीं थे, वे इस मामले में थोड़े अलग थे। उन्हें जाँच पड़ताल करना बड़ा अच्छा लगता था खासकर ऐसे विषयों पर जो मानव स्वाभाव से जुड़े हुए हो। 

जैसे कि “जब इंसान को किसी समस्या का सामना करना पड़े तब वो क़िस तरह से इनका सामना करता है?”, “इंसान का दिमांग किस तरह से काम करता है?”, “अपने समाज में लोगो के बिच शांति बनाये रखने के लिए क्या क्या जरूरी है? जो सर्वदा उचित तरीके से काम करें।” इस तरह के सवालो के जवाब ढूंढने के लिए अरस्तु अपने आस पास के माहौल को बारीकी से देखते थे और प्रायोगिक रुख रखते हुए बड़े इत्मिनान के साथ काम करते रहते थे।

जब अरस्तु युवा हुए तब वे महान प्लेटो की अकादमी में शामिल हुए। जैसे पौराणिक समय में लोग आश्रम में पढ़ते थे कुछ वैसे है प्लेटो की अकादमी थी जहा पर अरस्तु की पढाई शुरू हुई। प्लेटो भी दुनिया के महान दार्शनिको में से एक थे, समय रहते अरस्तु ने अपने गुरु के प्रभाव और उनकी शिक्षाओं को अच्छे से समझ लिया और अपने गुरु महान प्लेटो के गुजर जाने के बाद, अरस्तु भी इस रास्ते पर आगे बढ़ाते रहे लेकिन अपने खुद के तरीके से। 

जब तक उनके गुरु थे तब तक अरस्तु उनके बताये गये दिशा निर्देशों के साथ ही काम करते थे पर जब प्लेटो नहीं रहे तो उन्होंने समय के हिसाब से लोगो के बिच अपनी शिक्षा का प्रचार करना शुरू किया और उसे अपने तरीको को विकसित करना शुरू कर दिया था। 

उनके अनुसार किसी भी होने वाली घटना और मनुष्य के स्वाभाव के बिच एक तार्किक व्याख्या हो सकती है और इस बारे में अध्ययन भी किया जा सकता है। ऐसी कई बातो को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इसके लिए एक स्कूल भी खोला था, जो “लिसियम” के नाम से जानी जाती थी। वे लोगो से इस बारे में बात किया करते थे कि “दुनिया का हर इंसान अपनी जगह खुद बना सकता है, बशर्ते उस इंसान को इस बारे में ज्यादा जानने की जरुरत महसूस होती हो तब।” हर इंसान अपनी मौजूदा हालात से कई गुनाह बेहतर जिन्दगी जी सकता है। 

उसके बाद अरस्तु भी एक महान राजा के गुरु बने, जिस राजा का नाम था सिकंदर। गुरु अरस्तु की निगरानी में सिकंदर ने पूरी दुनिया जीती थी और विश्व विजेता बनकर दुनिया का महान राजा बना था। 

अरस्तु ने अपने जीवनकाल में कुछ 400 जितनी किताबे लिखी थी, जो अलग अलग विषयो पर आधारित थी। जिसमे भौतिकी, नाटक, संगीत, तर्कशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, जिवविज्ञान के अलावा कई ओर विषय भी शामिल है। अरस्तु के द्वारा रचित उनकी आध्यात्मिक रचनाएं आज भी क्रिस्चियन सभ्यता को प्रभावित कर रही है और बड़ी बड़ी कक्षाओं में उनके दर्शनों को आज भी बढाया जाता है।

उनकी लिखी हुई कई किताबे आज खत्म हो चुकी है, फिर भी कुछ किताबो को बचाया गया है जिससे लोगो को समझना काफी आसान हो जाता है। उनके द्वारा रचित पॉलिटिक्स के बारे में एक किताब है जो काफी प्रसिद्ध है और उससे भी बड़ी बात भौतिक विज्ञानं पर अरस्तु के विचारों ने मध्ययुग की पढाई पर गहरा असर डाला है, जिसे हम न्यूटन के भौतिकवाद की सहायता का अंतिम रूप भी समझ सकते है।

आज, यूनान के इतिहास के महान व्यक्तियों या दार्शनिको में प्लेटो, अरस्तु और सुकरात जैसे लोगो के नाम सबसे पहले लिए जाते है।

 

 

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जय हिन्द!

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