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Melissa Stockwell True Story True Story 

बम ब्लास्ट में बच गई तो जीना सिख गई, Melissa Stockwell True Story

जब आपको लगता है ना कि अब में हारने वाला हु या मेरा सपना पूरा नहीं होगा, असल में तब आपके पास वहां दो रास्ते है, पहला एक अच्छी और मजेदार जिदंगी की शुरुआत भी वही से होती है और दूसरा एक मनुष्य जीवन का समापन भी वही पर होता है, जिनमे से आपको कोई एक रास्ता चुनना पड़ता है। वो कहते है ना कि “कुछ लोग विपरीत परिस्थिति में टूट जाते है तो कुछ लोग सारे रिकॉर्ड तोड़ ड़ालते है”, मेलिसा की कहानी भी उनमे से एक है। 

 

Melissa Stockwell True Story

 

मेलिसा का जीवन अत्यंत रोमांचक भरा रहा है। वो छोटी थी तभी से उसके दो बड़े सपने थे, जिसमे पहला अपने देश की जिम्नास्ट बन के ओलंपिक में गोल्ड मैडल दिलवाना और दूसरा सपना आर्मी ज्वाइन करके अपने देश की सेवा करना।

उसके लिए उसने पूरी लगन से मेहनत की और एक दिन सेकंड लेफ्टिनेंट के हौदे से आर्मी ज्वाइन किया। फिर कुछ समय के लिए उसे ईरान जाना पड़ा, पर बदकिस्मती से मार्च 2004 में इराक़ बेज़कैंप के पास बम ब्लास्ट हुआ, जिसमे मेलिसा ने अपना दाया पैर खो दिया। जिससे मेलिसा के जीवन में अंधकार सा छा गया और वो निराश हो गई और पूरी तरह से टूट गई। लेकिन थोड़े समय के बाद उसे लगा कि वो बम ब्लास्ट में बच गई वोही सबसे बड़ी बात थी, और इस बात से उसकी जीने की उम्मीद फिर से जाग उठी, धीरे धीरे समय बदलता गया और वो आनंद से जूम उठी और वही से उसके नए जीवन की शुरुआत हुई।


मेलिसा ने पैर गुमाने के बाद कुछ दो महीने में ही कुत्रिम पैर लगा लिया। शुरू शुरू में मेलिसा को उठने बैठने के लिए लोगो पर निर्भर रहना पड़ा पर कुछ ही समय में मेलिसा आत्म निर्भर हो गई।

बचपन का जो सपना था जिम्नास्ट बनने का, मेलिसा उस बारे में ज्यादा सोचने लगी और उसे लगा कि वो एक पैर से भी जिम्नास्ट बन सकती है। अब दबी हुई इच्छा रखने वाली मेलिसा ने खेल को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का फ़ैसला किया और उस काम की शुरुआत की। मेलिसा कई संस्था से जुड़ी, जो उनके जैसे लोगों को खेल में आगे बढ़ने में मदद करती थी।

धीरे धीरे मेलिसा ने मैराथन, स्विमिंग और सायक्लिंन शुरू कर दी। आखिर एक दिन आया जब उसका बेइजिंग ओलंपिक में खेलने का सपना पूरा हुवा। उसे अमेरिकन स्विमिंग टीम में पंसद किया गया। उसके बाद उसने पैरा-एथलीट में हिस्सा लिया। उसने हल ही में अपनी पहली आइरोनमेंन ट्रायथलॉन ख़त्म की है। जिसमे 182.25 किलोमीटर साइकिलिंग करनी पड़ती है, 3.86 किलोमीटर स्वमिंग करनी पड़ती है। और एक मैराथन ख़त्म करनी पड़ती है जो मेलिसा ने एक पैर से किया।

“जीवन बहोत छोटा है। आप जो करना चाहते हो, वो आज और अभी कर लीजिए”। यह खूबसूरत बात अमेरिका की पैरा-एथलीट मेलिसा स्टॉकवेल ने कही है। वो हंमेशा सकारात्मक रहती है और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए हंमेशा प्रेरित करती है, वो कहती है “कभी भी मत डरो और हंमेशा नया करने के लिए तैयार रहो।”

अब मेलिसा अपनी कहानी बता के उन लोगों को मोटीवेट कर रही है जो लोग अपने जीवन से हार कर चुपचाप बैठे रहते है, जिनकी जीने की इच्छा मर चुकी हो या बदकिस्मती से किसी आकस्मिक घटना में चोट लगने की वजह से अपाहिज़ हो गए है।

 

आपका अभिप्राय जरूर दीजिये!

जय हिन्द!

 

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