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नास्तिक ने भी जूते उतारे, Atheist Also Remove here shoes

आखिर वास्तव में नास्तिक किसे कहें? ये प्रश्न जितना जटिल है, इसका उत्तर भी उतना ही जटिल है। नास्तिक यानि जिसे स्वयं से अधिक किसी पर भी विश्वास या भरोसा न हो।

यह कहानी एक नास्तिक इंसान की है, जो भगवन के बिलकुल खिलाफ है। घर में सब लोग उससे डरते है क्योंकि वो घर का गुजरान भी चलाता है और उम्र में भी सबसे बड़ा है। घर में भगवान की पूजा प्राथना तो क्या, कोई उनका नाम भी नहीं ले सकता था,  इसलिए घर के सभी लोग डर के मारे नास्तिक बने हुए थे।

उसे एक एलिस नाम की 10 साल की बेटी थी। उसे सभी लोग बहोत प्यार करते थे, क्योंकि घर में एक वो ही थी जो सभी के हँसने खेलने का खिलौना थी।

एक दिन की बात है जब एलिस की स्कूल में अचानक आग लग जाती है। पूरी स्कूल लकड़ी की बनी हुई थी इसीलिए आग बड़ी जल्दी से फ़ैल रही थी। स्कूल में चारो तरफ अफरा तफरी का माहौल बन गया था।

और ये बात एलिस के पिता को मालूम हुई कि अपनी गुड़िया मुश्किल में है। वो तुरंत अपनी गाड़ी निकाल के स्कूल की ओर निकल पड़े। रास्ते में वो बहोत परेशांन और व्याकुल हो जाते हे। स्कूल पहोंचते ही वो चालू गाड़ी से निचे उतर कर स्कूल की तरफ दौड़ने लगे। पूरी स्कूल आग की जपेट में आ चुकी थी और वो सभी बच्चो में अपनी एलिस को ढूंढ रहे थे। तभी स्कूल के अध्यापक मिलते है जो कह रहे थे कि सभी बच्चे मिल गये पर एलिस ही नहीं मिली रही, न जाने कहा रह गयी होगी!

 

ये बात सुनकर एलिस के पिता अपना होश खो बैठते है, वो एलिस को ढूंढ ने लिए आग की ओर दौड़ लगाते है।पर! अध्यापक उसे रोकते है क्योंकि आग में जाना एक पागलपन था और एलिस के पिता वही पर बेहोश होकर ढल पड़ते है।

जब वो होश में आते है तब अपने आप को अस्पताल में पाते है और एलिस उनके हाथो को पकड़कर खेल रही थी। अपनी बेटी एलिस को एकदम सही सलामत देखखर उनकी जान में जान आई और खुश हो गए। बिस्तर से उठकर एलिस को अपनी गोद में बिठाते है और जो कुछ भी हुआ उसे भूल ने की कोशिश करते हे।

एलिस को लेकर वो अस्पताल से घर की ओर निकले। उस दरम्यान एलिस को रास्ते में भगवन का मंदिर नजर आया। वो अपने पापा को पूछती है कि वो क्या है? वो कौन है? क्योंकी घर में तो कभी भगवन के बारे में कुछ सुना नहीं था। पहले तो वो थोड़ी देर चुप रहा क्योंकी वो भगवन में बिलकुल भी मनाता नहीं था तो इस बात का जवाब कैसे दू?

दूसरी बार एलिस ने पूछा कि पापा वो क्या है? पर फिर भी उसके पापा ने कुछ जवाब नहीं दिया तो एलिस ने जिद पकड़ी और गाड़ी भी बंद करवादी। अब वो ये तो बता नहीं सकता की वो भगवन है, क्योंकी अगर एलिस उसे मानने लगेगी तो? इसलिए एलिस को खुश रखने के लिए उसने बताया की वो एक खिलौना है।

तभी एलिस गाड़ी छे निचे उतरकर उस खिलौने की और भाग ने लगी। उसके पापा को ये पसन्द नहीं आया और वोभी उसके पीछे भाग पड़े उसे वहाँ जाने से रोकने के लिए। पर एलिस तब तक मंदिर पहोच जाती है। ये देखकर उसके पापा भी जूते समेत मंदिर में प्रवेश कर लेता है और एलिस को पकड़कर घसीटता हुआ बहार लाता है, पर एलिस बाहर जाने का नाम ही नहीं ले रही थी।

अब उसके पापा परेशान होकर एलिस को पूछते है कि तुम ये क्या कर रही हो?

एलिस फिर भी वहां जाने की जिद करती है और रोने लगती है। पर उसने आगे जो कहा वो सुनकर उसके पापा की बोलती बंध हो गई, एलिस ने कहा कि पापा ये खिलौना तो आप को जानता है, जब में स्कूल में आग से बचने के लिए डरकर एक कौने में चुप गयी थी तब ये खिलौना मेरे पास आया और मुझे अपनी गोद में लेकर बाहर तक छोड़ गया। जब मैंने उससे पूछा कि आप कौन हो? तब उसने बताया की मैं आपके पापा का परम मित्र हु और उन्हें अच्छी तरह से जानता हु।

अपनी बेटी की ये बात सुनकर पहले तो वो दंग रह गया कि ये एलिस क्या बोल रही हे ? पर आखिर उनकी आँखे खुली और कुछ देर बाद अपने और एलिस के जूते उतारकर दोनों मंदिर के अंदर गए।


अपनी बेटी को पास में बिठाकर उसने कहा कि बीटा ये खिलौना नहीं है और ये सिर्फ मेरा मित्र ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का मित्र है।

आप चाहे मानो या ना मानो मैं(भगवान्, अल्लाह, ईशु, राम, रहीम,) पृथ्वी के हर जिव की मदद करता हु।

 

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट करना न भूले, हम आपकी कमेंट का इंतजार कर रहे है।

जय हिन्द!

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