You are here
History of Barmuda Triangle in Hindi World History 

रहस्यमय बरमूडा ट्रायंगल का इतिहास, History of Barmuda Triangle in Hindi

21 वीं सदी को वैज्ञानिक सदी माना जाता है जहा पर अन्धविश्वास और आलौकिक शक्तियों के लिए कोई जगह नहीं है क्योकि विज्ञान सबुत माँगता है। आज उनके पास हर सवाल के जवाब ढूढने की ताकत है पर फिर भी कुछ ऐसे है जिसके सवाल आज भी जिन्दा है, जिसके जवाब विज्ञान के पास भी नहीं है। जिनमे “Barmuda Triangle” भी शामिल है।

 

रहस्यमय बरमूडा ट्रायंगल(Barmuda Triangle) का इतिहास

फ्लोरिडा, बरमूडा ट्राइंगल नार्थ अटलांटिक महासागर का वो हिस्‍सा है जिसे “डेविल्‍स ट्राइंगल” यानी “शैतानी त्रिभुज” भी कहा जाता है। जो अटलांटिक महासागर के बीच 39,00,000 वर्ग किलोमीटर में फैली जगह है। यानि की भारत के राजस्थान और महाराष्ट्र राज्य से भी बड़ी, जोकि एक का‍ल्‍पनिक त्रिकोण जैसी दिखती है, “बरमूडा त्रिकोड़” अथवा “बरमूडा त्रिभुज” के नाम से जानी जाती है। इस त्रिकोण के तीन कोने बरमूडा, मियामी तथा सेन जआनार, पुतौरिका को स्‍पर्श करते हैं।

यह वह जगह है जहां पर कई एयरक्राफ्ट्स और शिप्‍स हो गईं, किसी को भी पता नहीं लग सका। अमेरिकी नेवी का मानना है कि यह ट्राइंगल है ही नहीं है और अमेरिकी जियोग्राफिक नामों में ऐसा कोई भी नाम है ही नहीं। पर साल 1854 के बाद इस क्षेत्र में कुछ ऐसी घटनाऍं/दुर्घटनाऍं घटित होती रही कि इसे “मौत के त्रिकोण” के नाम से जाना जाता है।

बरमूडा ट्राइंगल का पहला जिक्र क्रिस्‍टोफर कोलंबस के जर्नल्‍स में मिलता है। उन्‍होंने लिखा था ट्राइंगल के अंदर जहाज के कम्‍पास ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद उन्‍होंने आसमान में आग का एक गोला देखा था।

बरमूडा त्रिकोण पहली बार विश्‍व स्‍तर पर उस समय चर्चा में आया, जब 1964 में आरगोसी नामक पत्रिका में इसपर लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख को विसेंट एच गोडिस ने लिखा था। इसके बाद से लगातार सम्‍पूर्ण विश्‍व में इसपर इतना कुछ लिखा गया कि 1973 में एनसाइक्‍लोपीडिया ब्रिटानिका में भी इसे जगह मिल गयी।

 

Barmuda Triangle | सबसे विख्‍यात दुर्घटना

बरमूडा त्रिकोण की सबसे विख्‍यात दुर्घटना 5 सितम्‍बर 1945 में हुई, जिसमें पॉंच तारपीडो यान नष्‍ट हो गये थे। उन उड़ानों का नेतृत्‍व कर रहे पायलोट ने दुर्घटना होने के पहले अपना संदेश देते हुए कहा था कि “हम नहीं जानते कि पश्चिम किस दिशा में है। सब कुछ गलत हो गया है। हमें कोई भी दिशा समझ में नहीं आ रही है। हमें 225 मील उत्‍तर पूर्व में होना चाहिए, लेकिन ऐसा लगता है कि” और उसके बाद आवाज आनी बंद हो गयी। उन यानों का पता लगाने के लिए तुरंत ही मैरिनर फ्लाइंग बोट भेजी गयी थी, जिसमें 13 लोग सवार थे। लेकिन वह बोट भी कहॉं गयी, इसका भी पता नहीं चला।

जब कभी भी कोई प्‍लेन या जहाज ट्राइंगल के ऊपर या आसपास नजर आया, वह दोबारा वहां से लौट नहीं सका। कभी किसी ने उस प्‍लेन या जहाज को नहीं देखा। यहां तक कि उनका मलबा तक नहीं मिला। इसकी वजह बताई जाती है ट्राइंगल के पास ही बहने वाली समंदर की तेज लहर जो तेजी से मलबे को अपने साथ बहा ले जाती है। 

बताया जाता है कि 100 वर्षों के दौरान यहां पर 1000 लोगों की मौत हो गई है। औसतन प्रतिवर्ष यहां पर चार एयरक्राफ्ट्स और 20 जहाज गायब हो जाते हैं।

 

वैज्ञानिकों का मत

इस क्षेत्र में होने वाले वायुयानों की दुर्घटना के सम्‍बंध में वैज्ञानिकों का मत है कि इसी प्रकार जब मीथेन बड़ी मात्रा में वायुमण्‍डल में फैलती है, तब उसके क्षेत्र में आने वाले यान का मीथेन की सांद्रता के कारण इंजन में ऑक्‍सीजन का अभाव हो जाने से वह बंद हो जाता है। ऐसी दशा में विमान पर चालक का नियंत्रण समाप्‍त हो जाता है और वह समुद्र के पेट में समा जाता है। अमेरिकी भौ‍गोलिक सवेक्षण के अनुसार बरमूडा की समुद्र तलहटी में मीथेन का अकूत भण्‍डार भरा हुआ है। यही वजह है कि वहॉं पर इस तरह की दुर्घटनाये होती रहती हैं।

तमाम जाँच पड़ताल के बाद भी आज तक ये पता नहीं चला कि इतने सरे विमानों और जहाजो को समुन्दर का पानी पि गया या आसमान खा गया? अगर यह दुर्घटना है तो कम से कम एक बार तो मलवा मिलना चाहिए न? यही कारण है कि बरमूडा त्रिकोण अभी भी एक अनसुलझा रहस्‍य ही बना हुआ है। इस रहस्‍य से कभी पूरी तरह से पर्दा हटेगा, यह कहना सभी के लिए मुश्किल है।”Barmuda Triangle”



आपका अभिप्राय जरूर दीजिये!


जय हिन्द!

Related posts

Leave a Comment

0 Shares
Share
+1
Tweet
Share
Pin
Stumble