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Dr APJ Abdul Kalam Motivational Story 

पक्षियों से भी ऊपर उड़ना एक पक्षी ने सिखाया, Dr APJ Abdul Kalam

यह कहानी ए. पी. जे. अब्दुल(Dr APJ Abdul Kalam) कलाम साब की है जब वे मात्र 10 साल की उम्र में पाचंवी कक्षा में पढ़ते थे। उनके स्कूल में एक बहुत ही बेहतरीन अध्यापक शिव सुबरमण्यिम अय्यर हुआ करते थे. उनकी क्लास को सभी बच्चे बहुत ही ध्यानपूर्वक पढ़ते थे। 

एक दिन उन्होंने ब्लैक बोर्ड पर पंख फड़फड़ाते पक्षी का चित्र बनाया. जिसमें उन्होने पक्षी के सिर, पूंछ तथा पूरे शरीर को उकेर कर समझाया कि पक्षी अपने आपको कैसे हवा में उठाते है? और कैसे वो उड़ान भरते है? उन्होंने यह भी समझाया कि उड़ान के वक्त वे कैसे अपनी दिशा बदलते है।

तक़रीबन आधे घंटे तक उन्होंने समजाया कि पक्षियों के उठाव, खिंचाव या एक साथ ज्यादा पक्षी मिलकर आसमान में वे अलग-अलग आकृतियां किस प्रकार बनाते हैं? क्लास ख़त्म होने के बाद उन्होंने जानना चाहा कि, कितने बच्चे को अच्छी तरह समझ में आया और कितने बच्चो को नहीं आया। 

तब कलाम साहब ने कहा कि ’’मुझे समझ में नहीं आया.’’ उसके बाद उन्होंने दूसरे बच्चों को पूछा जिनमे ज्यादातर बच्चों ने भी यही जवाब दिया कि हमे भी समझ में नहीं आया। बच्चों के इस जवाब के बाद भी सुबरमणियम सर निराश नहीं हुए। कुछ देर उन्होंने सोचा और बच्चों से कहा कि शाम को हम सब समुद्र तट पर जाएंगे और वहाँ पक्षियों को उड़ते हुए देखेंगें जिससे आप सभी बच्चो को सारी बात समझ में आ जायेगी।

उस शाम को सुबरमणियम सर कलाम साहब की पूरी क्लास को रामेश्वरम् के समुद्र तट पर ले गये। पूरी क्लास ने आनन्द पूर्वक समुद्री लहरों को टकराते हुए देखा, साथ ही पक्षियों को अलग अलग आकृतिया बनाकर उड़ते हुए भी देखा। 

MOTIVATIONAL STORY

जब बच्चो ने सुबरमणियम सर से इस बात का जवाब जाना तब क्लास के सभी बच्चे दंग रह गए, उन्होंने समझाया कि उड़ान भरते समय पक्षी किस तरह नजर आते हैं, पक्षी पंख फड़फड़ाते है तब उनकी पूंछ का झुकाव कैसे चलता है। बच्चों ने इस बात को ध्यान से नोटिस किया कि पक्षी जिस दिशा में चाहते है उसी दिशा में उड़ते हुए मुड़ जाते हैं।

सुबरमणियम सर ने क्लास से अगला सवाल किया कि “इन पक्षियों में इंजन कहाँ होता है? और इन्हे शक्ति कहाँ से मिलती है?”

नन्हे से कलाम साहब ने जवाब दिया कि ’’हमारी समझ में आ गया कि पक्षियों की जो इच्छा होती है, उसकी पूर्ती के लिये वे अपने शरीर से ही शक्ति प्राप्त करते हैं। यह सब बातें हमें कुछ ही मिनट में समझ आ गई।” आगे वे कहते है कि ’’ऐसे महान अध्यापक द्वारा हमें एक सैद्धांतिक पाठ को प्रायोगिक रूप से प्रकृति के उदाहरण दिखाकर समझाया जिससे हमें पक्षियों की पूरी गतिकी समझ में आ गई।

एक दिन शाम को क्लास के बाद कलाम साहब ने अपने अध्यापक महोदय से जानकारी हासिल की, कि उन्हे उड़ान के सम्बन्ध में पढ़ने के लिये आगे कैसे पढ़ाई करनी चाहिये? तो उन्होने बताया कि आप पूरी मेहनत और काबलियत के साथ आठवीं और उसके बाद हाई स्कूल तक की पढ़ाई करों। फिर जाकर उड़ान के सम्बन्ध में इन्जिनियंरिग कॉलेज में पढ़ाई करना।

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कलाम साहब बताते हैं कि ’’मेरे लिये यह घटना सिर्फ पक्षियों की उड़ान समझना मात्र ही नहीं थी। पक्षियों की उड़ान मेरे अन्दर घुस गई थी और मेरे अन्दर अलग अलग प्रकार के भाव जागृत हो गये और मैने तय कर लिया कि मेरी आगे की पढ़ाई, उड़ान तथा उड़ान विषय से सम्बन्धित रहेगी। इस प्रकार सुब्रमणियम सर के वास्तविक अध्यापन की इस घटना ने मेरा भविष्य का कैरियर तय कर दिया था।”

अध्यापक जी की इस सलाह और पक्षियों की उड़ान अभ्यास को समझाने की इस घटना ने कलाम साहब के जीवन का लक्ष्य तय कर दिया। वे कहते है कि ’’इस घटना से मेरे जीवन को एक लक्ष्य तथा मिशन मिल गया।’’ कॉलेज में फिजिक्स करने के बाद MIT में एरोनोटिकल इंन्जिनियंरिग का कोर्स किया। उसके बाद मेरा जीवन एक रॉकेट इन्जिनियर, एरोस्पेस इंजिनियर तथा टैक्नोलोजिस्ट के रूप में बदल गया। 

उसके बाद कलाम साहब के जीवन का पूरा सफर आप और में, हम सब बखूबी जानते है कि आज उनके द्वारा बनाये गए उपग्रह आसमान में इतनी ऊंचाई पर उड़ रहे है जिसे हम देख भी नहीं सकते।

आपका अभिप्राय जरूर दीजिये!

जय हिन्द!

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