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History of Eiffel Tower in Hindi World History 

एफिल टावर का इतिहास, History of Eiffel Tower in Hindi

हर साल लगभग 10 मिलियन लोग “दी एफिल टावर(Eiffel Tower)” को देखने के लिये आते है। यह मानव सर्जित आकृति आज पेरिस का मुख्य आकर्षण स्थल है। इस टावर को आज से कुछ 131 साल पहले बनाया गया था, जिसे अब तक कुछ 250 मिलियन लोग देखने आ चुके है

 एफिल टावर को फ्रांस देश के पेरिस शहर में बनाया गया है, जिसमे पिटवां लोहे की जालियो का इस्तेमाल किया गया था। इसे बनाने वाले महान इंजिनीर “गुस्तावे एफिल” के नाम पर ही इस टावर का नाम “दी एफिल टावर” रखा गया था।

साल 1884 की मई में मौरिस ने अपने घर पर काम करते हुए एफिल टावर की पहली डिजाईन बनाई थी। फिर इस काम में उनके साथी एमिले ने साथ दिया। ये दोनों इंजीनियर ही थे, वें दोनों ने कई साल तक अलग अलग आकर बनाये पर साल 1889 में उन्होंने इसका अंतिम आकर बनाया था। इसे बनाने का तात्पर्य यही था कि फ्रांस की क्रांति के 100 साल पुरे हुए थे इस ख़ुशी में इस टावर को बनाना था।

 उसके बाद “एफिल टावर” की डिजाईन को कई महानुभावो ने जाँच की। जिसमे कुछ लोगो ने इसकी प्रशंसा की तो कुछ लोगो ने इसकी आलोचना की। कई लोगो ने इसे अपनाने से साफ इंकार किया था।

काफी विवाद के बाद इसकी अंतिम डिजाईन को “एफिल” की सहायता मिली। एफिल एक होनहार इंजीनियर थे और उन्होंने “स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी” के आंतरिक भाग को भी डिजाईन किया था।

 जब डिजाईन को प्रदर्शित किया गया था तब एफिल ने टावर के संबंधित तांत्रिक और वास्तविक मुश्किलों पर लोगो के साथ चर्चा की, जिसमे उन्होंने बताया कि “यह एफिल टावर सिर्फ मॉडर्न इंजिनियर की कला कारीगरी ही नहीं बल्कि उद्योग और विज्ञान के क्षेत्र में एक नया चमत्कार होंगा”। 

और आखिर में अपना भाषण ख़त्म करते हुए उन्होंने कहा की “यह एफिल टावर फ्रांस का प्रतिक होंगा, अगर ये बनेगा तो”। 

उसके बाद इस टावर की डिजाईन में कई बदलाव किये गए और उसे बनाने के लिए बजट भी तय हुआ।फिर बजट पास होने के बाद डिजाईन की फिर से जाँच हुई, उस दौरान जो कमिया नजर आई उसे बारीकी से दूर की गई और उसके बाद टावर को बनाने का आदेश मिला।

उसके बाद फिर से विवाद शुरू हुए, जो विवाद टावर स्थापित करने की जगह को लेकर हो रहे थे। लेकिन आखिर में एफिल ने इससे संबंधित कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किये, जिसमे कुछ नियम लिखे गए थे। 

 नियम कुछ ऐसे थे कि “एफिल टावर में सिर्फ एफिल कंपनी का ही हिस्सा होगा और टावर का प्रतिनिधित्व भी कंपनी ही करेगी। और सबसे बड़ी बात ये लिखी गई थी कि इस टावर को बनाने के 20 साल बाद इसको गिरा दिया जायेगा।

जब इसको बनाने का काम शुरू हुआ तब फ्रांसिस सरकार ने मदद के लिए कुछ 1.5 मिलियन फ्रांसिस लोग भी दिये। फिर 2 साल, 2 महीने और 5 दिन लगातार काम करने के बाद एफिल टावर को जैसा डिजाईन किया था वैसा ही बनाया गया। 

 आज एफिल टावर में लगभग 18,000 मेटालिक भाग के हिस्से है, जो 2.5 मिलियन रिबेट की मदद से आपस में जुड़े हुए है।

इसकी ऊंचाई 324 मीटर यानि की 1063 फीट है, जो तक़रीबन 81 मंजिला ईमारत के समान होती है।टावर का ऊपरी हिस्सा कुछ 6 से 7 सेंटीमीटर हवा में झूलता है। उस वक्त ये फ्रांस की नहीं बल्कि दुनिया की सबसे ऊँची इंसानों द्वारा बनाई गयी आकृति थी। टावर को बनने के बाद तक़रीबन 41 सालो तक यह रिकॉर्ड उनके नाम रहा था।

 दूसरे विश्वयुद्ध से पहले पहले जर्मन के नाज़ी सैनिको ने एफिल टावर के उपर स्वस्तिक लगाने की कोशिश की, जो स्वस्तिक नाजियों का प्रतिक था पर वे ऐसा करने में असफल हुए थे। फिर दूसरे विश्वयुद्ध के दरमियान साल 1944 में हिटलर ने पेरिस के मिलिट्री गवर्नर “डीटरीच” को टावर को पूरी तरह से ध्वस्त कर देने का आदेश दिया पर जनरल “डिटरिच” ने ऐसा करने से मना कर दिया था।

टावर की सबसे उपरी सतह कुछ 276 मीटर ऊँची है। इस सतह को पर्यटकों की रमणीयता के लिये अच्छे से सजाई गई है। जहा पर जाने के लिए लिफ्ट का इस्तमाल होता है। टावर की ये लिफ्ट एक साल में लगभग 103,000 किलोमीटर का सफ़र करती है जो धरती की परिधि से ढाई गुना ज्यादा होती है। एफिल टावर की लिफ्ट को निचे से उपर ले जाने में तक़रीबन 15 यूरो खर्च होते है।

साल 2015 के एक सर्वे के मुताबित दुनिया में सबसे ज्यादा लोग “दी एफिल टावर” को देखने जाते है। हर साल लगभग 6.91 मिलियन लोग यहां पर आते है क्योकि यह दुनिया का सबसे आकर्षित और खूबसूरत टावर है।

हर 7 साल के बाद एफिल टावर को पेंट किया जाता है, उसके लिए कुछ 60 टन पेंट की जरुरत पड़ती है।रात को रौशनी से भरे इस टावर में 25,000 से ज्यादा बल्ब का उपयोग होता है। कुल मिलाकर 72 इंजिनियर, वैज्ञानिक और गणितज्ञों का नाम टावर की बाजू में लिखा गया है जिन्होंने इस टावर के बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

साल 1985 में बनी जेम्स बांड की फिल्म में भी एफिल टावर को दिखाया गया था और “बीटल्स” का एक गाना है जिसमे “सेमोलिना पिल्चार्ड” को एफिल टावर पर चढ़ते हुए दिखाया गया है। साल 2008 में एक लड़की ने एफिल टावर के साथ शादी कर ली और उसने अपना नाम बदलकर “एरिका ला टूर एफिल” रख दिया था।

आज ग्सुतावे एफिल द्वारा बनाई हुई यह आकृति फ्रांस की पहचान बन चूका है और आज एफिल टावर को पूरी दुनिया जानती है जो विश्व के सात अजूबो में से एक है।

 

 

आपका अभिप्राय जरूर दीजिये!

जय हिन्द!

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One thought on “एफिल टावर का इतिहास, History of Eiffel Tower in Hindi

  1. Unomand

    keep up posting these types of content.

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