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History of Kohinoor Diamond in Hindi World History 

दुनिया का सबसे प्रसिद्ध कोहिनूर हिरे का इतिहास, History of Kohinoor Diamond in Hindi

“कोहिनूर” शब्द सुनकर आपके दिमांग में सबसे पहले क्या आता है? हिरा, दुनिया की सबसे प्राचीन और बहु मूल्यवान चीजो में से “कोहिनूर का हिरा(Kohinoor Diamond)” एक है, शायद इसीलिए कोहिनूर शब्द सुनकर हमारे दिमांग में सबसे पहले हिरे का नाम आता है।

इतिहास कारको के पास कोई सटीक सबूत नहीं है कि असल में कोहिनूर हिरा सबसे पहले कहा से पाया गया था। कुछ लोगो का कहना है कि यह हिरा इसा पूर्व 3000 समय में एक शाही खजाना था वहा से मिला था तो कुछ इतिहास कारको के सबसे पहले संस्कृत भाषा में इस बारे में लिखा गया था और तब इस हिरे का नाम कुछ और था। पर आखिर में यह हिरा 13वीं सदी में हमारे भारत के आंध्रप्रदेश राज्य के गुंटूर जिले की कोल्लूर सुरंग में से मिला था।

इस हिरे का जितना आकर था, उतने बड़े आकर का हिरा आज तक किसी को नहीं मिला था और वो अलग अलग रंगों से चमकता हुआ बेहद खूबसूरत पत्थर था। इस हिरे का वजन कुछ 793 कैरेट था यानि कि 158.6 ग्राम था। इसकी खूबसूरती देखकर इसे कोहिनूर नाम दिया गया था, जिसे असल में “कोह-ए-नूर” कहते थे। यह एक पर्शियन शब्द है, जिसका मतलब होता है “रोशनियों के पहाड़”।

उस समय दिल्ही सल्तनत पर खिजली साम्राज्य के शासक अलाउदीन खिजली का शासन था जो धीरे धीरे दक्षिण भारत को लूट रहे थे। फिर साल 1310 में खिजली साम्राज्य ने वरंगल पर हमला किया और उन्हें हराकर खिलजी साम्राज्य ने कोहिनूर हिरे को हासिल किया।

फिर समय रहते मुग़ल के शासक बाबर ने खिजली साम्राज्य को हराकर हिरा हासिल किया और उसके बाद कुछ समय तक उस हिरे का नाम बदलकर उसे “बाबर का हिरा” नाम दिया गया। पर यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा, कोहिनूर हिरा एक जगह पर कभी टिका ही नहीं। एक साम्राज्य से दूसरे और दूसरे से तीसरे साम्राज्य तक हिरा फिरता रहा और साम्राज्य के अनुसार हिरे को नाम दिया जाता था। आखिर में कुल मिलाकर भारत के इतिहास में कई युद्ध हुए सिर्फ इस हिरे को पाने के लिए।

अंत में साल 1849 में जब पंजाब में अधिग्रहण हुआ उसके बाद यह हिरा ब्रिटिश की रानी विक्टोरिया के पास चला गया। उसके बाद रानी विक्टोरिया के पति प्रिंस अल्बर्ट ने साल 1852 में कोहिनूर को कटवाया और उसका वजन कुछ 186 कैरेट ही रह गया जो पहले 793 कैरेट का था। उसके बाद से वो हिरा आज भी ब्रिटिश की रानी विक्टोरिया के ताज में लगा हुआ है।

हर साल लंदन शहर के “टॉवर ऑफ़ लंदन” में लाखो लोग इस हीरे को देखते जाते है। पुराना भारत जिसमे भारत, पकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, ईरान और अफगानिस्तान सब एक ही देश था तो आज ये सभी देश की सरकार कई बार इस हीरे पर अपना अधिकार होने का दावा करती है और कई बार ब्रिटिश सरकार से वापिस भी माँगा गया है पर सामने ब्रिटिश सरकार दावा करती है कि इस हिरे को हमने क़ानूनी तौर पर हासिल किया है।

हिन्दू प्राचीन संस्कृति के मुताबित इस हिरे के साथ अभिशाप जुड़ा हुआ है, जिसमे ये हिरा जिस किसी के भी पास जायेगा उसका पतन हो जायेगा और बड़े बड़े शक्तिशाली साम्राज्यो ने और शासको ने इसे पाने के लिए युद्ध किये, जिससे वे साम्राज्य बर्बाद हो गए थे और वो सारे साम्राज्य जो पतन हो गए उसके पीछे कोहिनूर हिरे का नाम लिया जाता है।

आज यह प्रिसिद्ध हिरा दुनिया का सबसे कीमती हिरा है और आज तक उसकी सही कीमत कोई नहीं लगा पाया।

 

 

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जय हिन्द!

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