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Google CEO Sundai Pichai True Story True Story 

परेशानी में आपकी प्रितिक्रिया, Google CEO Sundai Pichai True Story

हाल ही में गूगल के सीईओ(CEO) सुन्दर पिचाई(Sundar Pichai) का भाषण था, जहा पर उन्होंने जो बात की थी उसमे से एक बेहद खूबसूरत कहानी है जो आपके सामने आज रखी जाएगी, क्योकि ये कहानी उन्ही लोगो ने सुनी थी जो लोग वहा पर मौजूद थे। वहा पर जो लोग मौजूद थे उनके अलावा भी दुनिया में करोडो लोग है तो सुन्दर पिचाई की ये कहानी उन लोगो के लिए आज लिखी गई है जो लोग वहा पर मौजूद नहीं थे।

एक दिन सुन्दर पिचाई एक रेस्टोरेंट में बैठे थे, जहां पर ओर भी लोग खाना खा रहे थे। ऐसे में उन्होंने वहा पर एक नजारा देखा। जिसमे एक टेबल पर कुछ महिलाये बैठी थी और अचानक एक कॉकरोच आया और एक महिला के ऊपर बैठ गया। जब महिला ने अपने कपड़ो पर वो कॉकरोच देखा तो एकदम से चिल्लाने लगी, असल में वो महिला डर चुकी थी जो डर उसके चेहरे पर साफ साफ दिखाई दे रहा था।

वें अब कापने लगी थी और कैसे भी करके वो अपने हाथो से उस कॉकरोच का पीछा छुड़ाना चाहती थी। महिला की प्रितिक्रिया देखकर उसके साथ बैठी महिलाये भी भयभीत हो गई थी। आखिर बाल बाल करके उस महिला ने अपनी आँखे बंद करके उस कॉकरोच को उड़ा दिया।

पर जैसे ही वो कॉकरोच वहा से उड़ा, जाकर वो पास में बैठी दूसरी महिला पर बैठ गया। अब जो ड्रामा पहली महिला ने किया था कुछ वैसा ही ड्रामा दूसरी महिला ने भी शुरू किया। इन महिलाओ की आवाज सुनकर रेस्टोरेंट का वेटर इस ओर आ रहा था, तभी इस महिला ने कॉकरोच को उड़ाया और वो सफल भी हुई, अब वह कॉकरोच वेटर की शर्ट पर आकर बैठ गया।

पर वेटर ने कोई ड्रामा नहीं किया और घबराने की बजाये वो शांत खड़ा रहा। कुछ देर के लिए वेटर कॉकरोच की हरकतों को देखता रहा। जब कॉकरोच एकदम शांत हो गया तब वेटर ने उसे अपनी उँगलियों से पकड़ा और उसे रेस्टोरेंट के बाहर फेंक दिया।

अब सुन्दर पिचाई बताते है कि “में कोफ़ी पीते हुए यह मनोरंजन देख रहा था और मेरे मन में एक सवाल उठा कि, क्या वो कॉकरोच इस पूरी घटना के लिए जिम्मेदार था या कुछ ओर?”

शायद आपका जवाब, हा होगा। तो रेस्टोरेंट का वेटर परेशान क्यों नही हुआ? वेटर ने तो बिना कोई शोर-शराबा किये ही उस स्थिति को आसानी से संभाल लिया था।  

कहने का मतलब ये है कि इस पूरी घटना का जिम्मेदार वो कॉकरोच नहीं था बल्कि इन महिलाओ की अक्षमता थी जो इस परिस्थिती को संभाल नहीं पाई और उसकी अक्षमता की वजह से ही उसे परेशान होना पड़ा।

आगे सुन्दर पिचाई कहते है कि “मैंने महसूस किया कि यह मेरे पिता का या मेरे बॉस का या मेरी वाइफ का चिल्लाना नही है, जो मुझे परेशान करता है बल्कि यह मेरी अक्षमता है, जिसमे लोगों द्वारा बनाई गयी परिस्थितियों को मैं संभाल नही सकता।”

“यह रोड पर कोई ट्रैफिक जैम नही है जो मुझे परेशान करता है बल्कि यह मेरी उस परेशानभरी स्थिति को ना संभाल पाने की अक्षमता है, जिस वजह से मैं ट्रैफिक जैम में परेशान हो जाता हु।”

“कहने का तात्पर्य यही है कि, वो परेशानी हमें उतना परेशान नहीं करती जितना परेशान हम उसकी प्रितिक्रिया से हो जाते है और इसी प्रितिक्रिया की वजह से हमारे जीवन में परेशानिया पैदा होती रहती है।”

आखिर में सुन्दर पिचाई ने कहा कि “इस घटना को देखकर मेरा सोचने का तरीका ही बदल दिया, जिंदगी में जब भी ऐसी परेशानिया आये तब इस तरह की प्रतिक्रिया कभी नही करनी चाहिए बल्कि परेशानी को समझकर उसका सामना करना करना चाहिए, वो भी शांति से जैसे उस वेटर ने किया था।”

जिंदगी को समझने के लिए एक आसान सा तरीका है कि जो लोग खुश है, वो इसीलिए खुश नही है कि उनकी जिंदगी में सब कुछ ठीक से चल रहा है बल्कि इसीलिए खुश है क्योकि जिंदगी के प्रति उनका दृष्टिकोण ठीक है, उनका नजरिया ठीक है, इसलिए।

 

 

आपका अभिप्राय जरूर दीजिये!

जय हिन्द!

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