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Galileo Galilei Biography in Hindi Biography 

गैलिलियो गैलिली का जीवन परिचय, Galileo Galilei Biography in Hindi

साल 1564 में 15 फ़रवरी के दिन गैलिलियो गैलिली(Galileo Galilei) का जन्म इटली के पीसा शहर मे हुआ था। जिस परिवार में उनका जन्म हुआ था वो परिवार एक संगीतज्ञ परिवार था। पास ही में उन्होंने अपनी स्कूल की पढाई की और जब वे 19 के हुए तब उन्होंने शहर की मुख्य यूनिवर्सिटी में मेडिसिन की पढाई के लिए दाखिला किया।

जैसे जैसे पढाई शुरू हुई वैसे वैसे मेडिसिन में उनकी रूचि कम होने लगी और जब यक़ीनन उन्हें लगा कि यह पढाई मेरी समझ के परे है तो उन्होंने मेडिसिन की पढाई छोड़ दी और बदलकर उन्होंने फिलोसोफी और गणित की पढाई करना शुरू किया। कुछ समय बाद घर की परिस्थिति ख़राब हो गई जिस वजह से गैलिली को मजबूरन साल 1585 में अपनी पढाई छोड़नी पड़ी।

वहा से निकलकर वे एक शिक्षक बन गए जहा पर वे थोड़ा बहुत कमाने लगे, जो कमाई की बचत हो रही थी उस कमाई के पैसो से उन्होंने फिर से गणित की जो पढाई बाकि थी वो शुरू की। जैसे ही उसकी पढाई ख़त्म हुई, गैलिली को शहर की मुख्य यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफेसर की नोकरी मिल गई और तीन साल तक उन्होंने वही पर नोकरी की।

साल 1592 में गैलिली पाडुआ यूनिवर्सिटी में चले गए और फिर साल 1610 तक वही पर रहे। जहा पर शायद उनका नया जीवन शुरू हो चूका था क्योकि वहा पर उन्होंने बहुत सारे प्रयोग किये थे। 

ईश्वर की भाषा गणित है

गैलिलियो अब न सिर्फ चीजो को देखते थे पर अब वे उन चीजो को बारीकी से समजने लगे कि प्रकृति के साथ इस चीज का क्या रिश्ता है? उनके पिता ल्युट नाम का एक वाध यंत्र बजाते थे जिस यंत्र को आज हम गिटार भी कह सकते है। उनके पिता ने अपने इस वाद्य यंत्र की तनी हुई डोरी और उससे निकलने वाली आवाज का बारीकी से अध्ययन किया और उन्हें समाज आया कि तार के तनाव और उससे निकलने वाली आवाज में कुछ न कुछ रिश्ता है। 

इससे प्रेरित होकर गैलिली ने अपने पिता के इस विचार को बढ़ावा दिया। उसके बाद उन्होंने कुछ प्रयोग किये जिसमे उन्होंने पाया कि प्रकृति के नियम एक दूसरे जुड़े हुए है,जैसे किसी एक के बढने और घटने के बीच गणित के समीकरणों जैसे ही संबंध होते है। इस बात से प्रेरित होकर उन्होंने लिखा था कि “ईश्वर की भाषा गणित है।”

गैलिली सिर्फ एक खगोलविज्ञानी ही नहीं बल्कि एक कुशल गणितज्ञ, दार्शनिक और भौतिकविध्द भी थे। शायद इसलिए गैलिली को प्रयोगात्मक विज्ञान के पिता माना जाता है। क्योकि उन्होंने दोलन के सूत्र का भी वितरण खोज निकल था।

प्रयोग 

प्रकाश की गति नापने का सबसे पहला प्रयोग गैलिली ने किया था। वे और उनके एक दोस्त दोनों मध्य रात्रि में लालटेन लेकर पहाड़ियों में गए। अब तय ये हुआ कि जैसे ही गैलिली की लालटेन का प्रकाश दिखे उसी समय उसके दोस्त की लालटेन को खोलना था क्योकि गैलिली को दोनों लालटेन खुलने के बिच का जो समय था वो नापना था की प्रकाश की गति कितनी है। और दोनों अलग अलग पहाड़ी पर चढ़ गए और इस तरह उन्होंने सवेरे की पहली किरण के प्रकाश की गति ज्ञात की पर यह पक्की नहीं थी।

गैलिली ने इस प्रयोग के फिर से किया और उस बार दोनों की पहाड़ियों के बिच दुरी पहले से ज्यादा रखी गई। उन्होंने प्रयोग किया और प्रकाश की गति का समय जो पहली बार में आया था वोही समय दोबारा भी आया। पर गैलिली को समझ में आ गया कि अगर प्रकाश की गति नापनी है तो मुझे कुछ और करना पड़ेगा इस तकनीक से यह मुमकिन नहीं है। 

उसके बाद गैलिली ने एक बड़ी मीनार पर चढ़कर वहा से अलग अलग आकर के पत्थरो निचे फेका। इससे उन्होंने यह जाना कि पत्थरो के आकर अलग अलग होने के बावजूद भी सभी पत्थरो का गिरने का समय एकसमान था। उन्होंने दूसरी जगह पर भी यही प्रयोग किया और परिणाम वोही मिला, एकसमान समय। 

उसके बाद गैलिली ने दुनिया को जड़त्व (“टकराव(Friction)”) का सिद्धांत दिया। जो नियम कई सालो बाद न्यूटन के गति के सिद्धांतों का पहला सिद्धांत बना।

खगोलीय अध्धयन

गैलिली ने दूरबीन का आविष्कार किया। उन्होंने दूरदर्शी यंत्र को ज्यादा मजबूत बनाया। अपनी शक्तिशाली दूरबीन के जरिये उन्होंने बहुत से खगोलीय अध्धयन किये। जिसमे उन्होंने चांद पर जो गड्ढे है भी देखे। उस समय तक का सिध्धांत ये था कि पृथ्वी ब्रमांड के केन्द्र में स्थित है और सूर्य, चंद्र और बाकि के ग्रह लगातार पृथ्वी की परिक्रमा करते है पर गैलिली ने पाया कि ब्रमांड में स्थित सभी ग्रह, पृथ्वी समेत सूर्य की परिक्रमा करते है। उन्होने शुक्र ग्रह और बृहस्पति ग्रह का अध्धयन किया। 

उन्होंने सूर्यमंडल का बारीकी से अध्ययन किया, जिस वजह से सूर्यमंडल को ठीक-ठीक समझने में बड़ी मदद मिली। इन्ही सब वजहों से गैलिली को आधुनिक प्रायोगिक खौगोलीकी के जनक माना जाता है।अल्बर्ट आइन्स्टीन जैसे महान वैज्ञानिक ने भी गैलिली को “आधुनिक विज्ञान का पिता” का दर्जा दिया है।

कारावास की सजा

अपने धर्म के प्रति पूर्ण निष्ठा थी पर उनका ज्ञान उन्हें किसी भी पुरानी चीजो का बिना प्रयोग किये और गणित के तराजू में तोले बिना रह नहीं सकते थे और सामने चर्च के नियम इसे अपनी अवज्ञा समझता था।

गैलिली ने जब कहा की पृथ्वी और बाकि के ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते है जिससे धर्मगुरुओं पुरानी अवधारणाओं का खंडन हुआ ओट चर्च ने इसे अपनी अवज्ञा मानकर गैलिली को कारावास की सजा सुनायी गयी।

साल 1633 में चर्च ने कहा की तुम माफ़ी मांगोगे तो तुम्हारी सजा माफ़ कर दी जाएगी। उस वक्त गैलिली बूढ़े हो चुके थे और अपनी उम्र देखकर उन्होंने मजबूरन जुठ का स्वीकार किया और चर्च से माफ़ी मांगली, पर उसके बावजूद भी उन्हें फिर से कारावास में डाल दिया गया था। बढ़ती उम्र के कारन वे ज्यादातर बीमार रहते थे जिस वजह से उन्हें खुद के ही घर में कैद कर दिया। 

अपनी जिंदगी के आखरी कुछ साल उन्होंने अंधेरो में ही बिताये और साल 1642 में अपने ही घर में सजा भुगतते हुए उनकी मृत्यु हो गई।

उसके कई सालो बाद, साल 1992 में वैटिकन शहर के ईसाई धर्म की मुख्य संस्था ने इस बात का स्वीकार किया कि गैलिली के नियमो के खिलाफ निर्णय लेने में हमसे गलती हुयी थी। अब मजे की बात ये है कि उस चर्च को अपनी इस ऐतिहासिक भूल का स्वीकार करने में साढे तीन सौ सालों से भी ज्यादा का समय लगा।

साल 1609 में दूरबीन के निर्माण और गैलिली के सूर्यमंडल के अध्ध्यनों के चार सौ सालों के बाद 400वीं जयंती के रूप में साल 2009 को “अंतर्राष्ट्रीय खगोलिकी वर्ष” के रूप में मनाया और गैलिलियो गैलिली जैसे महान वैज्ञानिक को श्रद्धांजलि देकर भूल का प्रायश्चित करने का प्रयास किया गया जो बड़े अफ़सोस की बात है।

 

आपका अभिप्राय जरूर दीजिये!


जय हिन्द!

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