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guglielmo marconi in hindi True Story 

इतिहास छोटा पर इस्तेमाल लंबा, guglielmo marconi in hindi

“guglielmo marconi” रेडियो वेव्स का इतिहास तो लंबा नहीं है पर उनका इस्तेमाल सबसे ज़्यादा किया जा रहा है। आज के तकनिकी सुवर्ण युग में हमारे पास एक जगह से दूसरी जगह पर बात करने के लिए एक छोटा सा यंत्र है जिसे हम मोबाइल फ़ोन कहते है। इसके अलावा स्थानिक गतिविधियां सुनने के लिए, समाचार या फिर क्रिकेट मैच का स्कोर जानने के लिए FM, रेडियो है। छबि के स्वरूप में समाचार या मनोरंजन के लिए टेलीविज़न है, सॅटॅलाइट कम्युनिकेशन, सेना में रडार मारफत या वायरलेस कम्युनिकेशन, सब रेडियो वेव्स सेंडिंग और रिसीवर के ऊपर कार्यरत है, वो भी लंबे अरसो से।

यह सब काम हम आसानी से कर रहे है उसके पीछे एक इंसान ने अपनी पूरी जिंदगी लुटादी थी, तब जाके हम आज यह सब आसानी से कर पा रहे है, चलिए जानते है उस इंसान के बारे में कि उन्होंने यह कैसे किया था। 

 

इतिहास छोटा पर इस्तेमाल लंबा(Guglielmo Marconi)

गुलेयलिमो मारकोनी इटली के बोलोगना में 25 अप्रैल, 1876 को पैदा हुए थे। एक युवक के रूप में वो शारीरिक और विद्युत विज्ञान के साथ आकर्षित हो गये था। शिक्षा दीक्षा निजी तौर पर घर पर ही हुयी थी। विध्यार्थी जीवन में ही उस बात को भाँप लिया था कि हेर्ट्स(Hertz) द्वारा उत्पन्न की गयी विद्युत चुम्बकीय तरंगो की मदद से संदेश भेजा जा सकता है।

उसकी माँ ने उसे इंग्लिश बोलना और पियानो बजाना सिखाया। मारकोनी परिवार धनिक था इसीलिए खानगी ट्यूशन के ज़रिये गुलेयलिमो को स्कूल के पाठ पढाये गए पर गुलेयलिमो को उन पाठो में ज़रा सी भी दिलचस्पी नहीं थी। कभी कभी स्कूल की पढाई से भागने के लिए वो हॉकी खेल लिया करते थे या फिर अपने पापा की लायब्ररी में किताबें पढ़ लिया करते थे। गुलेयलिमो को ग्रीकी पौराणिक कहानियां बेहद पसंद थी, जैसे कि हर्कुलस की कहानी, जिसमे मसीहा जैसे कर्मा हो वैसी कहानियां।

जैसे जैसे ही गुलेयलिमो बड़े होते गए वैसे वैसे उनकी रूचि विज्ञान की तरफ ज़्यादा बढ़ने लगी। धीरे धीरे वो स्टीम इंजन और बिजली के बारे में ज्यादा पढने लगे, पर मुश्किल ये थी कि सिर्फ वांचन करना उनके लिए काफी नहीं था,जिसके बारे में उन्होंने वांचन किया था उनका वो हर स्वाद चखने थे

जब गुलेयलिमो ने बेंजामिन फ्रेंक्लिन और उसने किये हुए बिजली के कारनामो के बारे में पढ़ा तब उन्होंने पहली बार इस बारे में सोचा और साहस भी किया। जिसमे उन्होंने स्ट्रिंग और खाने की प्लेट से बने एक कोंटरापशन के माध्यम से उच्च वोल्टेज बिजली डालने का फैसला किया और परिणाम बेहद धुंआधार आया। जब इस बात का पता उनके पापा को हुआ तब उन्होंने यह कहकर उसे बहार भेजा कि “अपनी युवावस्था ऐसी बेवकूफ तकनीको से बर्बाद मत करो में तुम्हे स्कूल भेज रहा हूं।”

 

True Story

यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा में वो उत्तीर्ण नहीं हो पाये पर एक टेक्निकल स्कूल ने उसको स्वेच्छिक इच्छा से प्रवेश दे दिया।

उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वे ऐल्प्स में अपनी छुट्टियां मना रहे थे। पहाड़ की चढ़ाई से थके हुए अगले दिन वो होटेल में कुर्शी पर बैठे हुए न्यूसपेपर पढ़ रहे थे। उसमे एक आर्टिकल था जिसमे जर्मन  भौतिकशास्त्री ने खोज की थी कि बिजली की चुम्बकीय तरंग पृथ्वी की चारो और अंतरिक्ष यात्रा के माध्यम से एक ही सेकंड में कई गुना रफ़्तार से घूम सकती है।

तुरंत ही गुलेयलिमो ने घर जाकर सीधे अपने वर्कशॉप में प्रयोग करने शुरू कर दिए। उसने हवा के ज़रिये ट्रांसमीटर से चिंगारी को टेबल की इस तरफ से उस तरफ भेजने की कोशिश की और वह सफल भी हो ग़ये।

सफलता की ख़ुशी में उन्होंने नया प्रयोग शुरू कर दिया। हवा के माध्यम से विद्युत तरंगो को भेजके घंटी बजे ऐसी उन्होंने कोशिश करी। वो दिनरात वर्कशॉप में ही रहने लगे और उनकी माँ भी उनको वर्कशॉप में ही खाना देने लगी  चार  महीनों के बाद उनको आखिर सफलता मिल ही गयी।

एक दिन अचानक आधी रत को उसने अपनी माँ को जगाया और निचे वर्कशॉप में ले गए। उनको दिखाया की उसने क्या किया। उन्होंने अटारी के दोनों अंत पर तारकुंजी को टेप किया था और घंटी बज गयी। तारकुंजी और घंटी के बिच कोई तार नही था, सिर्फ हवा का माध्यम था। गुलेयलिमो ने आखिर तरंगो को कैसे संचारित किया जा सकता है उसकी खोज कर ली थी।

 

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अब उन्होंने इन तरंगो को कितनी दूर भेजा जा सकता है उस पर प्रयोग करना शुरू दिया। उन्होंने ज्यादा शक्तिशाली ट्रांसमीटर बनाने शुरू कर दिए और बाद में वो इंग्लैंड से कनाडा तक तरंगो को भेजने में सफल हुए। बाद में गुलेयलिमो को नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया, उन्होंने ट्रान्सकांटिनेंटल संदेशों को ऑपरेट करती कंपनी मारकोनी का निर्माण किया।

आपको शायद पता नहीं होगा की मारकोनी एंड को. की वजह से 1912 की टाइटैनिक दुर्घटना में ७०० जितने लोगो को बचाया गया था और ऐसी कईं घटनाओ में विश्वस्तर पर रेडियो के माध्यम से कईं लोगो को बचाया गया है, शायद इसीलिए गुलेयलिमो को “रेडियो के पिता(guglielmo marconi)” का दर्जा दिया गया।

है न छोटा सा इतिहास, छोटे से न्यूज़पेपर की छोटी सी खबर ने तरंगो को दूर दूर तक पहोचा दिया।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट करना न भूले, हम आपकी कमेंट का इंतजार कर रहे है।

जय हिन्द!

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