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मिस्र के पिरामिडों का इतिहास, History of Egyptian Pyramids in Hindi World History 

मिस्र के पिरामिडों का इतिहास, History of Egyptian Pyramids in Hindi

दुनिया का इतिहास जितना लंबा और बड़ा है उससे कही गुना ज्यादा रहस्यमय भी है। सदियो से लोग ऐसे रहस्यो पर से पर्दा हटाने की कोशिश करते आ रहे है और उसे जो सफलता मिलती है वो या तो सच होता है या एक अनुमान होता है? यह भी एक सवाल ही तो है। आज जिस बारे में बात करने वाले है वो “मिस्र के पिरामिडो” का रहस्य भी एक पहेली है जो आज तक किसी से भी नहीं सुलझी।

मिस्र सभ्यता का एक सोने का समय था जब वे दुनिया की अमीर और शक्तिशाली सभ्यताओ में से एक थी। आज के समय में मिस्र के कुछ 138 पिरामिड है, जिनमे से कुछ पिरामिड जैसे की “गीजा का पिरामिड”, जो दुनिया की शानदार मानव निर्मित कारीगरी में से एक है।

प्राचीन मिस्र साम्राज्यो के तीसरे और चौथे राजवंशो के समय में मिस्र सभ्यता ने आर्थिक समृद्धि और स्थिरता का जबरदस्त आनंद लिया क्योकि उस समय का राजा प्रजाप्रेमी था। जिस वजह से मिस्र सभ्यता में उस राजा को सन्मान मिला और सब मिस्रवासियों का मानना था कि इस राजा को देवताओ ने चुना है और दुनिया में उसे लोगो की सेवा करने के लिए भेजा है जो मिस्र के तीसरे राजवंश के राजा जोसर थे।

 

WORLD HISTORY

 

जब राजा जोसर की मौत हुई तब प्राचीन मिस्र सभ्यता का मानना था की राजा की आत्मा उसके शरीर के साथ बनी रहे इसीलिए उसकी लाश को संभलकर रखी गई और उसकी आत्मा की देखभाल करने के लिए जरूरी चीजे भी साथ में रखी गई जिनमे सोना, खाना-पीना वैगेरह चीजे थी। राजा का ध्यान रखने के लिए उसके साथ राजा के रिश्तेदारों, अधिकारियों और पुजारियों को भी दफनाया गया। जहा पर इसा पूर्व 2630 के आसपास मिस्र का सबसे पुराना पिरामिड बनाया गया जो तीसरे राजवंश के राजा जोसर के लिए था। यह पिरामिड “चरण पिरामिड” के नाम से जाना जाता है।

दुनिया के सात अजूबो में पिरामिड भी शामिल है लेकिन सभी पिरामिड नहीं बल्कि सिर्फ एक ही पिरामिड जो “गीजा का महान पिरामिड” है।

यह पिरामिड मिस्र के चौथे वंश के राजा खुफु ने बनाया था जो दुनिया की सबसे लंबी निल नदी के किनारे से थोड़ी दुरी पर है। गीजा पिरामिड इसा पूर्व 2589-2566 में बना था जो सभी पिरामिडों में सबसे ऊंचा पिरामिड है और उसकी उंचाई 481 फ़ीट है। गीजा पिरामिड के पास दो ओर पिरामिड है जो उसकी रानी और उसकी माँ के लिए है। दूसरे पिरामिडों की तरह यहां पर भी उसके रिश्तेदारो और अधिकारियो को साथ में दफनाया गया था, उसकी देखभाल करने के लिए।

गीजा पिरामिड की बगल में एक ओर पिरामिड बनाया गया जो खुफु के बेटे खफ्रे के लिए था। खफ्रे पिरामिड के अंदर चुना पत्थर से एक मूर्ति बनाई गई है जिसमे शेर का शरीर और इंसान का सिर है जो प्राचीन समय की सबसे बड़ी मूर्ति थी। जिसकी ऊंचाई 66 फ़ीट की थी।

 

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इन पिरामिडों को बनाने के लिए कुछ 23 ब्लॉक पत्थर का इस्तिमाल किया गया था जिसका औसत वजन 2.5 टन प्रति पत्थर था। प्राचीन ग्रीक इतिहासकारक हेरोडोटस ने लिखा है की इस पिरामिड को बनाने के लिए 20 साल लगे थे और कुछ 1,00,000 मजदूरो ने मिलकर काम किया था पर पुरातात्विक प्रमाणों से इस पिरामिड को बनाने के लिए 20,000 मजदूरो ने काम किया था।

इन पिरामिडों का काम पांचवें और छठे राजवंशो तक चलता रहा पर उसके बाद इसमें गिरावट आई क्योकि राजाओ के पास धन की कमी होने लगी थी। लेकिन इसा पूर्व 2375-2345 में पिरामिडों का निर्माण फिरसे शुरू हुआ जो राजा उनस ने किया। उसके बाद बने पिरामिडों के अंदर राजा के शासनकाल में बनी घटनाओ के लेख लिखे जाने लगे, इसी वजह से पिरामिडों को ग्रंथो के रूप में भी जाना जाता है जो प्राचीन मिस्र की महत्वपूर्ण धार्मिक रचनाये है।

फिर इसा पूर्व 2278-2184 में छठे राजवंश के दूसरे राजा “पेप्य” ने 94 साल तक शासन किया और उसके शासनकाल में पेप्य पिरामिड बनाया गया जिसका काम 30 साल तक चला, जिस वजह से मिस्र की समृद्धि घटती गई और पेप्य की मौत के बाद मिस्र लगभग ध्वस्त हो गया। मिस्र सभ्यता ने पहली बार अशांत मध्यवर्ती काल में प्रवेश किया, उसके बाद मिस्र की धरती पर इतने बड़े पिरामिड कभी नहीं बने।

आज के समय में हर साल लाखो लोग मिस्र के पिरामिडों की यात्रा करने के लिए जाते है, मिस्र की समृद्ध और गौरवशाली कारीगरी के उसके विशाल पिरामिडों को देखने के लिए।

हम आपसे इतना जानना चाहेंगे कि आपको यह आर्टिकल कैसा लगा? कृपया निचे कमेंट देकर जरूर बताये।

जय हिन्द!

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