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Karl Benz Biography in Hindi Biography 

कार्ल बेंज का जीवन परिचय, Karl Benz Biography in Hindi

“Karl Benz” आज अगर आप घर से बहार निकलेंगे तो पार्किंग से लेकर बड़े बड़े हाईवे पर आपको अलग अलग तरह के वाहन नजर आएंगे। तो इनकी शुरुआत कहा से हुई थी? दुनिया में सबसे पहली कार किसने बनाई थी? कैसी दिखती थी? और रोड पर पहली बार कब दौड़ी थी?

 

कार्ल बेंज का जीवन परिचय

जर्मनी के लोकप्रिय व्यक्ति में से एक कार्ल बेंज का जन्म साल 1844 की 25वीं नवम्बर के दिन जर्मनी के मुहलबर्ग में हुआ था। कार्ल के बचपन में ही उसके पिता का देहांत हो गया था। उसकी माँ ने कार्ल को माता पिता दोनों का प्यार दिया और उसका अच्छे से भरण -पोषण किया। घर के हालात कुछ ठीक नहीं थे उसके बावजूद भी उन्होंने कार्ल को अपनी मेहनत से पढाई के लिए भेजा और उसकी पढाई को कभी रुकने नहीं दिया। 

पर माँ की मेहनत रंग लाई क्योकि कार्ल अच्छे से पढ़ रहे थे और जैसे जैसे वे बड़े होते जा रहे थे वैसे वैसे बदलते जा रहे थे। वे उस समय साइकिल और घोड़ागाड़ियों के बारे में ज्यादा पढ़ते थे और कार्ल ने 19 साल की आयु में अपनी मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री हासिल करली और मैकेनिकल की कंपनी में काम करना भी शुरू कर दिया। उन्होंने कई कंपनियो में काम किया, कुछ जगह पर मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में तो कुछ जगह पर एक डिज़ाइनर के रूप में।

काफी कुछ सिखने के बाद आखिर कार्ल ने अपने एक दोस्त के साथ साल 1871 में अपनी पहली “आयरन फाउंड्री एंड मैकेनिकल वर्कशॉप” की शुरुआत की। कुछ खास परिणाम मिल नहीं रहा था इसलिए साल 1872 में उनकी होने वाली पत्नी ने इस कंपनी में कार्ल के जो दोस्त थे उनके सभी शेयर खरीद लिए।

कोशिश की आगे बढ़ने की पर जैसा पहली बार हुआ था दोबारा भी कुछ वैसा हु हुआ। दोनों ने इस बार ज्यादा मेहनत की पर उसके बाद भी वो अपनी कंपनी को अच्छी तरह से चला नहीं पाए। अब हुआ ये की कार्ल अपनी कंपनी में भी काम करने लगे और उसके साथ उन्होंने एक पेटेंट्स पर बारीकी से काम करना शुरूकिया।

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कार्ल की कंपनी तो शुरू ही थी पर उसकी पेटेंट्स कंपनी से आगे निकल गई और साल 1878 की 31वीं दिसम्बर के दिन दो “स्ट्रोक इंजन” के अविष्कार कार्ल ने किये जो पेट्रोल से चलते थे। फिर साल 1879 में कार्ल ने इन इंजन के लिए पेटेंट्स भी हासिल कर लिया। पर ये तो सिर्फ शुरुआत हुई थी उसके बाद कार्ल ने इस तरह के सात ओर पेटेंट्स हासिल किये।

पर दुःख की ये थी कि कार्ल की कंपनी अभी भी पानी में बैठी हुई थी जिस वजह से कंपनी चलाने के लिए कार्ल को बैंक से लोन लेने की नोबत आ गई। पर कंपनी  खर्चा देखकर बैंक ने लोन देने से मना कर दिया और बैंक ने कहा कि अगर आप कंपनी को “जॉइंट स्टॉक कंपनी” बना सकते हैं तो ही बैंक आपको लोन देगा। 

इस चक्कर में कार्ल ने अपनी कंपनी को जॉइंट स्टॉक कंपनी में तबदील कर दिया और बैंक से लोन मिला पर कार्ल के पास अपनी कंपनी के सिर्फ 5% शेयर ही बचे। पर समय रहते बैंक ने कार्ल की कंपनी में जो उत्तर चढाव आते थे उस पर ध्यान देना ही बंद कर दिया, जिससे कार्ल को साल 1883 में अलग होना पड़ा।

पर कार्ल ने ज्यादा इन्तेजार नहीं किया और साल 1883 में ही अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर “बेंज & कंपनी रहेंइसचे गैस्मोटेरें-फैब्रिक” नाम की कंपनी की स्थापना की जिसमे वे इन्डस्ट्रीअल मशीन बनाने लगे और कंपनी इसमें सफल भी हुई। अपनी सफलता को देखते हुए कार्ल ने अपना पसंदीदा काम भी साथ में शुरू किया “होर्सलेस कैरिज(बिना घोड़े वाली गाड़ी)” बनाने का।

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साल 1885 में कार्ल ने एक ट्री-साइकिल को इंजन से जोड़ा। उसे चलाने के लिए कार्ल ने खुद के डिजाईन किये हुए 4 स्ट्रोक इंजन का इस्तेमाल किया। इसको तक़रीबन 5 महीने बाद रोड पर दौड़ाया गया। 

इस नई डिजाईन का नाम “बेंज पेटेंट मोटरवागेन” था जो लोगो बिच साल 1986 की पहली जुलाई के दिन दौड़ाया गया, जिसमे दो लोग बैठ सकते थे। बाद में कार्ल ने इस मॉडल में काफी सुधर किये और अपनी पत्नी और बच्चे के साथ कुछ 108 किलोमीटर का सफ़र तय किया। 

इस सफर के दरमियान आने वाली तकलीफों को निदान किया गया, जैसे कि ढलान पर गाड़ी कैसे दौड़ती है वगेरह और इसके बाद कार्ल बेंज ने इसी ही गाड़िया बनाना शुरू कर दिया जो जर्मन में बहुत काम समय में कोलप्रिय हो गई। कार्ल के इस पूरे सफ़र में उनकी पत्नी ने हर कदम पर साथ दिया जिस वजह से उसकी कंपनी देश की सबसे बड़ी कंपनी बन पाई।

कार्ल ने अपने पुरे जीवन में गाड़ियों और इंजिनों के इतने अविष्कार किये कि वो जर्मन के एक लोकप्रिय व्यक्ति बने। आज के ज़माने की सबसे महंगी गाड़ियों में से एक “मर्सेडीज़ बेंज(Mercedes benz)” कार्ल बेंज की कंपनी की देन है।

 

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जय हिन्द!

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