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Sir Isaac Newton Biography in Hindi Biography 

सर आइजेक न्यूटन का जीवन परिचय, Sir Isaac Newton Biography in Hindi

यूनाइटेड किंगडम के वूल्स्थोर्पे में एक किसान परिवार था, जिसमे घर का जो मुख्य सदस्य था उसका नाम न्यूटन(Isaac Newton) था। उसकी पत्नी गर्भवती थी और न्यूटन की मृत्यु हो गई। कुछ तीन महीने बाद 3 जनवरी, 1643 के दिन उस गर्भवती औरत ने एक बच्चे को जन्म दिया जो इतना दुबला और कमजोर था की बाल बाल उसे बचाया गया। तीन महीने पहले ही उसके पिता की मृत्यु हुई थी और उसका जो नाम था वोही नाम इस बच्चे को दिया गया “आइजेक न्यूटन”।

कुछ तीन साल बाद उसकी माँ ने दूसरी शादी करली, पर उसके सौतेले पिता को कमजोर न्यूटन अच्छा नहीं लगा। जिस वजस से न्यूटन को अपने दादा-दादी के पास भेज दिया गया और उसकी माँ न्यूटन के सौतेले पिता के साथ चली गई।

लिंकनशायर की किंग्स स्कूल में न्यूटन की पढाई शुरू हुई। वे शरीर से तो कमजोर थे पर पढाई में भी वे इतने ही कमजोर थे। इनकी शारीरिक अवस्था को लेकर स्कूल के बच्चे उन्हें काफी परेशान करते थे, जिस वजह से न्यूटन हंमेशा उनसे झगड़ा करता था। बार बार झगड़ा करने की वजह से न्यूटन को स्कूल से निकाल दिया गया।

उसी समय उसके सौतेले पिता की भी मृत्यु हो गई और न्यूटन को फिर से अपनी माँ के साथ रहने का मौका मिल गया। स्कूल के अध्यापक की वजह से न्यूटन को फिर से किंग्स स्कूल में पढाई करने का मौका मिल गया, उसके बाद उसकी पढाई ने काफी सुधार नजर आने लगे। उसके बाद उन्हें गणित पढ़ना सबसे ज्यादा पसंद था और हैरानी की बात ये है की सूर्य के किरणों को देखकर उसे आचार्य होता था।

साल 1661 में न्यूटन को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला मिल गया। साथ में अपनी फीस भरने के लिए वे उस जगह पर एक कर्मचारी की नोकरी भी करते थे। जहा पर तीन साल बाद उन्होंने एक थेओरएम की ख़ोज की, वही से उन्होंने गणितीय सिध्धांतो को समजना और विकसित करना शुरू किया और इस थ्योरम को बाद में कैल्कुलस “द्रितीय प्रमेय” के नाम से जाना गया।

जब उसकी कॉलेज की डिग्री खत्म हुई, उसके तुरंत बाद ही महामारी प्लेग रोग फ़ैल गया जिस वजह से शहर की सारी कॉलेजो को बंध कर दिया गया। न्यूटन वापस घर लौट आये और उसके बाद के दो सालो में उन्होंने “कैल्कुलस”, “लॉ ऑफ़ ग्रविटेशन” और “ऑप्टिक्स” के सिध्धांतो को पूरी तरह विकसित किया।

पर दुनिया की सबसे बड़ी खोज उन दो सालो में बनी एक छोटी सी घटना से हुई, जिस घटना ने एक नई दुनिया को जन्म दिया। उन दिनों न्यूटन एक सेब के पेड़ के निचे बैठे थे, अचानक एक सेब उसके सिर के ऊपर गिरा और उसके मन में एक सवाल पैदा हुआ जिसका जवाब दुनिया में किसी के भी पास नहीं था कि ये सेब निचे ही क्यों गिरा? वो दाये ओर भी जा सकता था और बाये ओर भी जा सकता था, या ऊपर भी जा सकता था तो ये सेब निचे ही क्यों गिरा? और इस सवाल के जवाब ढूढने की शुरुआत हुई।

न्यूटन ने जिस कैल्कुलस को विकसित किया था उसे किसी भी जर्नल में प्रकाशित नहीं किया गया था, जैसा था वैसा ही रहने दिया, पर हुआ ये कि साल 1684 में लेइबिन्ज नाम के एक व्यक्ति ने कैल्कुलस को प्रकाशित कर दिया और सामने न्यूटन ने अपने पुराने कैल्कुलस को साल 1693 में प्रकाशित किया। जिस वजह से काफी विवाद हुए और यह विवाद तब तक चले जब तक की लेइबिन्ज की मृत्यु न हुई। उसके बाद रॉयल सोसाइटी ने जांच की और पता लगाया कि कैल्कुलस को न्यूटन ने ही विकसित किया है।

फिर न्यूटन का ऑप्टिक्स का सिद्धांत आया, जिसमे उन्होंने बताया कि सूर्य का प्रकाश सिर्फ सफ़ेद रंग का नहीं है बल्कि वो कई रंगों का मिश्रण है जिसे दुनिया इंद्रधनुष भी कहती है।

आखिर समय रहते उन्होंने अपने जवाब खोज निकाला कि सेब निचे ही क्यों गिरा था? कई साल बीत जाने के बाद उन्होंने यह पाया कि धरती के अंदर गुरुत्वाकर्षण नाम की एक शक्ति है, जिसमे धरती हर चीज को अपनी तरफ खिंचती है और इसी शक्ति की वजह से चन्द्रमा पृथ्वी के चक्कर लगाती रहती है। जितनी बड़ी चीज होगी उतनी ही ताकत से धरती उस चीज को अपनी ओर खिंचेगी।

गुरुत्वाकर्षण बल के सिद्धांत में न्यूटन ने तीन नियम बताये जो फिजिक्स की दुनिया के आधार स्तंभ साबित हुए। जिसे ध्यान में रखकर दो पहिये की साइकिल से लेकर बड़े बड़े जहाज़ भी बनाये जाते है।
उन्होंने बाइबल में अपनी शोधों के बारे में भी लिखा और बिना शादी किये ही उन्होंने अपनी जिंदगी गुजार दी। साल 1727 की 20 वीं मार्च के दिन उनकी सोते हुए मृत्यु हुई।
वहा की महारानी एनी ने सर आइजेक न्यूटन के शंशोधनो के लिए उसकी कॉलेज को “नाईट दी उपाधि” भी दी।
“न्यूटन” विज्ञानं की दुनिया का वो चमकता सितारा था जिससे पूरा विज्ञान रोशन हुआ था | न्यूटन ने विश्व को ऐसे वैज्ञानिक सिद्धांत दिए जिसके बिना हम विज्ञान की कल्पना भी नही कर सकते है शायद इसी वजह से साल 2005 में एक अंतर्राष्टीय सर्वे हुआ था, जिसमे सर आइजेक न्यूटन को दुनिया के सबसे लोकप्रिय वैज्ञानिक का दर्जा मिला था और दुनिया हमेशा उनकी आभारी रहेगी।

 

 

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जय हिन्द!

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