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Thomas Alva Edison in Hindi Motivational Story 

एक झूठ ने इतिहास रच दिया, Thomas Alva Edison in Hindi

अगर आप एक बच्चे है तो शायद यह कहानी नहीं पढोगे पर अगर आप किसी बच्चे के मम्मी पापा, दादा दादी या कुछ ओर, या फिर आने वाले कल में अगर आपके बच्चे होने वाले है तो यह कहानी जरूर पढियेगा।

दुनिया में दो तरह के झूठ बोले जाते है, पहला वो जो हम खुद के लिए बोलते है जिससे  हमारा खुद का ही फायदा होगा ऐसा हम सोचते है। दूसरा वो जो हम दुसरो के लिए बोलते है जिससे किसी दूसरे या दुसरो का फायदा होता है।

खेर झूठ तो झूठ है, जो आज नहीं तो कल या कल नहीं तो बरसो बाद एक न एक दिन सबके सामने आएगा ही और तब जाकर हमें पता चलता है की उस एक झूठ से हमारा कितना नुकसान हुआ और कितना फायदा हुआ? अब सच ये है कि खुद के लिए बोले गए झूठ से हमारा नुकसान ही होता है पर कभी कभी दुसरो के लिए बोला गया झूठ बहोत सकारात्मक साबित हो सकता है। हमारी उम्मीद से भी ज्यादा सकारात्मक।

अब एक कहानी पढ़िए ताकि आपको यह समझ आये कि कुछ जगह पर झूठ बोलना ज्यादा अच्छा रहता है बजाय सच की।

एक झूठ ने इतिहास रच दिया

एक बच्चा ऐसे ही खेलते खेलते अपनी स्कूल से घर आया और सबसे पहले अपनी मोम को ढूंढने लगा। मोम के सामने जाकर स्कूल बेग खोलकर उसमे से एक लेटर निकाला और देते हुए कह रहा था कि यह लेटर मुझे मेरी टीचर ने दिया है और बोला था की घर जाकर अपनी मोम को दे देना।

उसकी मोम ने लेटर खोला और पढ़ा, पढ़ने के साथ ही वो रोने लगी।  बच्चा खड़े खड़े सब देख रहा था और उसने पूछा कि क्या हुआ मोम? क्या लिखा उस लेटर में?

उसने लेटर में जो लिखा था वो सब पढ़ा कि आपका बीटा दूसरे बच्चों की कंपेर में ज्यादा होनहार है और हमारी स्कूल शायद उसके लिए बहुत छोटी है क्योकि हमारे पास उतने साधन सामग्री और उतने अच्छे टीचर नहीं है। तो प्लीज आप खुद ही अपने बच्चे को पढ़ाइये।

समय बीतता गया और वो बच्चा धीरे धीरे बड़ा होने लगा, और बिलकुल वैसा ही हुआ जैसा उस लेटर में लिखा था कि यह बच्चा कुछ ज्यादा ही होनहार है या फिर उस बच्चे ने खुद को ऐसा ही मान लिया था कि में होशियार हु और में कुछ अलग जरूर कर सकता हु। बस फिर ऐसा ही हुआ उसने कुछ अलग ही काम किया जो पूरी दुनिया में कोई नहीं पाया था। उसने अंधकारमय सृष्टि को रौशनी दी, उसके बाद ही हम रात को बिना अग्नि से भी हमारा काम आराम से करने लगे।

 

कुछ सालो बाद जब उस बच्चे की मोम गुजर चुकि थी और वो बच्चा एक बहुत ही बड़ा वैज्ञानिक बन गया था। एक दिन वो घर में कुछ पुरानी चीज ढूंढ रहा था और अचानक उसकी नजर एक पुराने लेटर पर पड़ी। लेटर उठाकर खोला और उसमे कुछ लिखा था वो पढ़ा कि आपके बेटे का दिमांग ठीक से काम नहीं कर रहा और हम उसे इस स्कूल में ओर नहीं पढ़ा सकते। तो प्लीज आप अपने बेटे को खुद ही पढ़ाइये।

ये वोही लेटर था जो टीचर ने बरसो पहले उसकी मोम को दिया था। यह पढ़कर वो कुछ एकाद घंटे तक रोता रहा और खुद की डायरी में लिखा कि थॉमस अल्वा एडिसन बहुत ही कमजोर बच्चा था पर एक सही माँ ने नायक की भूमिका निभाई और उस कमजोर बच्चे को सदी का सबसे होनहार इंसान बनाया।

अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट करना न भूले, हम आपकी कमेंट का इंतजार कर रहे है।

जय हिन्द!

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